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हिरोशिमा कविता (अज्ञेय)

कविता: हिरोशिमा (अज्ञेय) एक दिन सहसा सूरज निकला अरे क्षितिज पर नहीं, नगर के चौक : धूप बरसी पर अंतरिक्ष से नहीं, फटी मिट्टी से। छायाएँ मानव-जन की दिशाहिन सब ओर पड़ीं-वह सूरज नहीं उगा था वह पूरब में, वह बरसा सहसा बीचों-बीच नगर के: काल-सूर्य के रथ के पहियों के ज्‍यों अरे टूट कर बिखर गए हों दसों दिशा में। कुछ क्षण का वह उदय-अस्‍त! केवल एक प्रज्‍वलित क्षण की दृष्‍य सोक लेने वाली एक दोपहरी। फिर? छायाएँ मानव-जन की नहीं मिटीं लंबी हो-हो कर: मानव ही सब भाप हो गए। छायाएँ तो अभी लिखी हैं झुलसे हुए पत्‍थरों पर उजरी सड़कों की गच पर। मानव का रचा हुया सूरज मानव को भाप बनाकर सोख गया। पत्‍थर पर लिखी हुई यह जली हुई छाया मानव की साखी है।

Urdu Shayar

      शुरुआती जीवन  इंशा का जन्म जालंधर जिले , पंजाब , भारत के फिल्लौर तहसील में हुआ था।   उनके पिता राजस्थान से थे।   1946 में , उन्होंने पंजाब विश्वविद्यालय से बीए की डिग्री प्राप्त की और बाद में 1953 में कराची विश्वविद्यालय से एमए किया। वह रेडियो पाकिस्तान , संस्कृति मंत्रालय और पाकिस्तान के राष्ट्रीय पुस्तक केंद्र सहित विभिन्न सरकारी सेवाओं से जुड़े रहे।   1940 के दशक के उत्तरार्ध में , इब्न - ए - इंशा लाहौर में प्रसिद्ध फिल्म कवि साहिर लुधियानवी के साथ भी एक साथ रहे थे।   वे प्रगतिशील लेखक आंदोलन में भी सक्रिय थे।   इब्न - ए - इंशा ने 11 जनवरी 1978 को हॉजकिन के लिम्फोमा से मरने से पहले अपना शेष जीवन कराची में बिताया था , जबकि वह लंदन में थे।   बाद में उन्हें कराची , पाकिस्तान में दफनाया गया। साहित्यिक कैरियर इंशा को उनकी पीढ़ी के सर्वश्रेष्ठ कवियों और लेखकों में से एक माना जाता है।     इब्न - ए...

उदय प्रकाश की कविता

 कविता~  एक जल्दबाज बुरी कविता में आंकड़े-  कविता का एक वाक्य लिखने में दो मिनट लगते हैं इतनी देर में चालीस हजार बच्चे मर चुके होते हैं ज्यादातर तीसरी दुनिया के  भूख और रोग से दस वाक्यों की खराब जल्दबाज कविता में अमूमन लग जाते है बीस से पच्चीस मिनट इतनी देर में चार से पाँच लाख बच्चे समा जाते हैं मौत के मुँह में कविता अच्छी हो इतनी की कवि और आलोचक उसे कविता कहना पसंद ना करें या उसके कई ड्राफ्ट तैयार हों तो तब तक कई करोड़ बच्चे, कई हज़ार या लाख औरतें और नागरिक मर चुके होते हैं निरपराध इस विश्वतंत्र मे यानी ज्यादा मुकम्मल कविता के नीचे एक बहुत बड़ा शमशान होता है जितना बड़ा शमशान उतना ही कवि और राष्ट्र महान।            -उदय प्रकाश