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रामचंद्र शुक्ल : उद्धरण

 

हिंदी विषय के लिए सबसे महत्वपूर्ण किताब है -आचार्य रामचंद्र शुक्ल का हिंदी साहित्य का इतिहास।  इसके हर पृष्ठ की  प्रत्येक पंक्ति बहुत महत्वपूर्ण है।  यहां कुछ पंक्तियाँ दी जा रही हैं। 
  1. कबीर का ज्ञान पक्ष तो रहस्य और गुहा की भावना से विकृत मिलेगा पर सूफियों से जो प्रेम तत्व उन्होंने लिया वह  सूफियों के यहां चाहे कामवासना ग्रस्त हुआ हो , पर निर्गुण पंथ में अविकृत रहा। 
  2. वैष्णवों की कृष्ण भक्ति शाखा ने केवल प्रेमलक्षणा  भक्ति ली ;  फल यह हुआ की उसने अश्लील विलसिता की  प्रवत्ति जगाई। 
  3. सगुन और निर्गुण के नाम से भक्तिकाव्य की दो धाराएं विक्रम की १५ वीं  शताब्दी के अंतिम भाग से लेकर १७ वी  शताब्दी के अंत तक सामानांतर चली।  
  4. पद्मावत में प्रेमगाथा की परंपरा पूर्ण प्रौढ़ता को प्राप्त मिलती है.
  5. शेख्नबी से प्रेमगाथा परंपरा समाप्त समझनी चाहिए। 
  6. प्रेम और श्रृंगार का ऐसा वर्णन जो बिना किसी लज़्ज़ा और संकोच के सबके सामने पढ़ा जा सके , गोस्वामी जी का ही है। 
  7. गीतावली की रचना गोस्वामी जी ने सूरदास जी के अनुकरण पर की है। 
  8. सूर के श्रृंगारी पदों की रचना बहुत कुछ विद्यापति की पद्धत्ति पर हुई है। 
  9. काव्यरीति का सम्यक समावेश पहले पहल आचार्य केशव ने किया। 
  10. भावों का बहुत उत्कृष्ट और उद्दात  स्वरुप बिहारी में नहीं मिलता।  कविता उनकी श्रृंगारी है, पर प्रेम की उच्च भूमि पर नहीं पहुचतीं, नीचे ही रह जाती है. 

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